Some Places Are Like Poems

“गहरी नीली शाम, सर्द बर्फीली हवा,
बारिश की कुछ हलकी बूँदें
कांगडी़ की ज़रा-सी आंच
दूर बादलों से झांकते ऊँचे-ऊँचे पहाड़
कच्चे-पक्के ख्वाब-सा, ज्यादा-ज्यादा सच-सा, एक जहाँ हसीं-सा …”

Continue reading “Some Places Are Like Poems”